28 July, 2022

बतौ द ! हे सरकार ?

(जोशीमठ का हेलंग गौं मा घसेरी कु घास सिपे अर अधिकारी लोगोंन छीन दीनी, ये बुरा बकत मा जब जल-जंगल-जमीन से जनता कु अधिकार लगातार छीनी जाण्या च त सरकार से कुछ सवाल)

 


ूका डंगरों का गिचा पर म्वोल कन के लगों

मिन अपणा गौड़ी-भैंसी, बल्द-बखरा कख चरौंण

बतौ द ! हे सरकार ?

बतौ द ! हे सरकार ?

 

(भूखे जानवरों के मुँह पर मोहरी कैसे लगाऊं

मैं अपने गाय-भैंस, बैल-बकरियां कहाँ चुगाउँ

बताओ तो ! हे सरकार ?

बताओ तो ! हे सरकार ?)

 

पुरखों कु पौराई बणों मा कतक्या पीढ़ी पली गेनी

अब किले मेरु घास तुमारा ख़्वारों मा पीडांण लेगी

बतौ द ! हे सरकार ?

बतौ द ! हे सरकार ?

 

(पुरखों द्वारा संरक्षित वन में कितनी ही पीढ़ी पल गई

अब क्यों मेरा घास तुम्हारे दिमागों में चुभने लग गई

बताओ तो ! हे सरकार ?

बताओ तो ! हे सरकार ?)

 

मि एक घस्यारी छौं, क्वि घुसपैठ नि करी मिन

किले तुमारा पुलिस अर फ़ौजी मेरा पिछ्याड़ी पड़ गिन

बतौ द ! हे सरकार ?

बतौ द ! हे सरकार ?

 

(मैं एक घस्यारी हूँ, हम कोई घुसपैठ नहीं किये

क्यों तुम्हारे पुलिस और फौजी मेरे पीछे पड़ गए

बताओ तो ! हे सरकार ?

बताओ तो ! हे सरकार ?)

 

सरकारी जमीन पर जब कंपनी कु राज़ ह्वे जालू

त क्या हम मन्ख्यूँ ते इनि बेदखल करी जालू

बतौ द ! हे सरकार ?

बतौ द ! हे सरकार ?

 

(सरकारी जमीन पर जब कंपनी का राज़ हो जाएगा

तो क्या हम इंसानों को ऐसे ही बेदखल किया जाएगा

बताओ तो ! हे सरकार ?

बताओ तो ! हे सरकार ?)

 

पर ये भी बतावा जब बिक जालू सेरू पहाड़

हम पहाड़ी रैवासियूँबासा रौंण के गाड़

बतौ द ! हे सरकार ?

बतौ द ! हे सरकार ?

 

(और ये भी बताओ जब बिक जाएगा सारा पहाड़

हम पहाड़ी रहवासियों ने रात बितानी है किस गाड़

बताओ तो ! हे सरकार ?

बताओ तो ! हे सरकार ?)

 

महेन्द्र ‘आज़ाद’

17/07/2022

No comments:

Post a Comment