(जोशीमठ का हेलंग गौं मा घसेरी
कु घास सिपे अर अधिकारी लोगोंन छीन दीनी, ये बुरा बकत मा जब जल-जंगल-जमीन से जनता कु अधिकार लगातार
छीनी जाण्या च त सरकार से कुछ सवाल)
भूका डंगरों का गिचा पर म्वोल कन के लगोंण
मिन
अपणा गौड़ी-भैंसी, बल्द-बखरा कख चरौंण
बतौ
द ! हे सरकार ?
बतौ
द ! हे सरकार ?
(भूखे
जानवरों के मुँह पर मोहरी कैसे लगाऊं
मैं
अपने गाय-भैंस, बैल-बकरियां कहाँ चुगाउँ
बताओ
तो ! हे सरकार ?
बताओ
तो ! हे सरकार ?)
पुरखों कु पौराई बणों मा कतक्या
पीढ़ी पली गेनी
अब किले
मेरु घास तुमारा ख़्वारों मा पीडांण लेगी
बतौ
द ! हे सरकार ?
बतौ
द ! हे सरकार ?
(पुरखों
द्वारा संरक्षित वन में कितनी ही पीढ़ी पल गई
अब क्यों
मेरा घास तुम्हारे दिमागों में चुभने लग गई
बताओ
तो ! हे सरकार ?
बताओ
तो ! हे सरकार ?)
मि एक घस्यारी छौं, क्वि घुसपैठ नि करी मिन
किले तुमारा पुलिस अर फ़ौजी मेरा पिछ्याड़ी पड़ गिन
बतौ
द ! हे सरकार ?
बतौ
द ! हे सरकार ?
(मैं एक घस्यारी हूँ,
हम कोई घुसपैठ नहीं किये
क्यों तुम्हारे पुलिस और फौजी मेरे पीछे पड़ गए
बताओ
तो ! हे सरकार ?
बताओ
तो ! हे सरकार ?)
सरकारी जमीन पर जब कंपनी कु राज़ ह्वे जालू
त क्या हम मन्ख्यूँ ते इनि बेदखल करी जालू
बतौ
द ! हे सरकार ?
बतौ
द ! हे सरकार ?
(सरकारी जमीन पर जब कंपनी का राज़ हो जाएगा
तो क्या हम इंसानों को ऐसे ही बेदखल किया जाएगा
बताओ
तो ! हे सरकार ?
बताओ
तो ! हे सरकार ?)
पर ये भी बतावा जब बिक जालू सेरू पहाड़
हम पहाड़ी रैवासियूँन बासा रौंण के गाड़
बतौ
द ! हे सरकार ?
बतौ
द ! हे सरकार ?
(और ये भी बताओ जब बिक जाएगा सारा पहाड़
हम पहाड़ी रहवासियों ने रात बितानी है किस गाड़
बताओ
तो ! हे सरकार ?
बताओ
तो ! हे सरकार ?)
महेन्द्र ‘आज़ाद’
17/07/2022